Wed, 30 Sep 2026 · IST English

गाइड

क्या सट्टा मटका भारत में लीगल है?

सीधा जवाब: नहीं। भारत के ज़्यादातर हिस्सों में सट्टा मटका पर दांव लगाना गैर-कानूनी जुआ है। 1 मई 2026 से पूरे देश में ऑनलाइन पैसे वाले खेल, जिनमें मटका ऐप भी शामिल हैं, और उनके विज्ञापन पर भी रोक है। यहाँ मुख्य कानून आसान भाषा में।

यह सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। भारत में जुआ राज्य का विषय है, इसलिए नियम राज्य के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

राज्यों के जुआ कानून

सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 और उसके बाद राज्यों के बनाए जुआ कानून "कॉमन गेमिंग हाउस" चलाने या वहाँ जाने, और किस्मत के खेलों पर दांव लगाने पर रोक लगाते हैं। सट्टा मटका किस्मत का खेल है और कोई भी राज्य इसे लाइसेंस नहीं देता। केरल, पंजाब या नागालैंड जैसी सरकारी लॉटरियों के उलट, मटका बाज़ार निजी और अनियमित हैं।

मटका के गढ़ महाराष्ट्र और गुजरात में बॉम्बे जुआ निवारण अधिनियम, 1887 लागू है। इसकी धारा 12A के तहत पुलिस उस व्यक्ति को बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है जो जुए में मदद के इरादे से कोई ख़बर या जानकारी छापे, प्रकाशित करे या फैलाए।

ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम, 2025

ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन अधिनियम, 2025 अगस्त 2025 में संसद से पास हुआ और अपने नियमों के साथ 1 मई 2026 से लागू है। यह "ऑनलाइन मनी गेम" पर रोक लगाता है, यानी ऐसा कोई भी ऑनलाइन खेल (हुनर का हो या किस्मत का) जिसमें पैसे जीतने की उम्मीद में पैसा लगाया जाए। ऑनलाइन मटका ऐप सीधे इसके दायरे में आते हैं। इस कानून के तहत:

कुछ गेमिंग कंपनियों ने इस कानून को चुनौती दी है और मामला सुप्रीम कोर्ट में है, लेकिन कोई रोक (स्टे) नहीं लगी है। इसलिए कानून आज लागू है।

खेलने वालों के लिए इसका मतलब

सट्टा मटका हियर क्या करता है, और क्या नहीं

हम जानकारी के लिए घोषित रिजल्ट और पुराने चार्ट दिखाते हैं। हम कोई दांव नहीं लेते, टिप्स या "फिक्स गेम" नहीं बेचते, कोई बाज़ार नहीं चलाते, और किसी बेटिंग ऐप या साइट का लिंक या विज्ञापन नहीं देते। अगर जुए से आपको या किसी अपने को परेशानी हो रही है, तो मदद उपलब्ध है: Tele-MANAS 14416 (मुफ़्त, 24×7)।